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कालसर्प योग क्या होता है?

ये बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ये योग भी 12 प्रकार का होता है और श्रेणी के अनुसार ही इसका प्रभाव कम, ज्यादा या भयावह होता है

कालसर्प योग क्या होता है?

कालसर्प योग का नाम सुनते ही डर बैठ जाता है। इस दोष से पीड़‍ित जातक जीवन में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव देखता है। जातक महत्वाकांक्षी होते हुए भी पूर्ण सफलता से वंचित रह जाता है।

राहु व केतु के बीच सभी ग्रह आने पर कालसर्प योग का निर्माण होता है।

हमारे प्राचीन ग्रंथों में राहु को काल और केतु को सर्प कहा गया है।मानसागरी ग्रंथ के चौथे अध्याय के 10 वें श्लोक में कहा गया है कि शनि, सूर्य व राहु लग्न में सप्तम स्थान पर होने पर सर्पदंश होता है।

धार्मिक ग्रंथों में राहु को अधिदेवता-काल और केतु को प्रत्यधि देवता-सर्प माना गया है। इसलिए इनका पूजन अनिवार्य है। कालसर्प योग शांति, जन्म शांति है इसे नकारा नहीं जा सकता।

सामान्यतौर पर बस कालसर्प योग को ही जाना जाता है ।

ये बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ये योग भी 12 प्रकार का होता है और श्रेणी के अनुसार ही इसका प्रभाव कम, ज्यादा या भयावह होता है

 

कुलिक कालसर्प योग

अगर किसी जातक की कुंडली के दूसरे घर में राहु और आठवें घर में केतु मौजूद हो तो यहां कुलिक कालसर्प योग बनता है। यह योग जातक के जीवन में कई प्रकार की कठिनाइयां लेकर आता है। ऐसे इंसान का स्वास्थ्य तो खराब रहता ही है, साथ ही शरीर के किसी भाग पर इतना गहरा आघात पहुंच सकता है कि वह अंग भंग भी हो सकता है। साथ ही इस व्यक्ति का वैवाहिक जीवन भी सुखद नहीं हो पाता। कभी-कभी दंपत्ति के बीच उत्पन्न विवाद तलाक में भी तब्दील हो जाता है।

वासुकि कालसर्प योग
जब किसी जातक की कुंडली के तीसरे भाव में राहु और नौवें भाव में केतु स्थित हो, इसके अलावा अन्य सभी ग्रह इन दो पापी ग्रहों के बीच में आ जाएं तो यहां वासुकि कालसर्प योग का निर्माण होता है। यह योग जातक के जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं लेकर आता है।

पितृदोष
कुंडली में वासुकि कालसर्प योग की उपस्थिति पितृदोष की तरफ भी इशारा करती है। जिस भी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष और पितृदोष एक साथ हों तो यह उस जातक की कुंडली पर ही ग्रहण साबित होता है। ऐसे व्यक्ति को स्वयं तो परेशानियां झेलनी ही पड़ती हैं लेकिन साथ में उसका परिवार भी कई समस्याओं से घिर जाता है।

 

शंखपाल कालसर्प योग
कुंडली के चौथे भाव में राहु, दसवें भाव में केतु की मौजूदगी के साथ सभी ग्रहों का इन दोनों के बीच में आ जाना शंखपाल कालसर्प योग का निर्माण करता है। इस कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति बुरी संगत में पड़कर बुरे कार्यों में लिप्त हो जाता है।

पदम कालसर्प योग
राहु का पांचवें घर में और केतु का ग्यारहवें घर में बैठना, अन्य ग्रहों का का इनके बीच में आजाना पदम कालसर्प योग बनाता है। ऐसी कुंडली वाले जातक को संतानहीनता का सामना करना पड़ता है। अगर संतान होती भी है तो वह शारीरिक या मानसिक रूप से विकलांगता का शिकार होती है। अगर यह योग ज्यादा बलवान हो तो व्यक्ति ऐसी संतान का पिता या माता बनते हैं जिन्हें समाज मान्यता नहीं देता।

इसी प्रकार के अन्य सात कालसर्प योग भी हैं
जैसे:-

  • महापदम कालसर्प योग
  • तक्षक कालसर्प योग
  • कारकोटक कालसर्प योग
  • शंखचूड़ कालसर्प योग
  • घातक कालसर्प योग
  • विषधर कालसर्प योग
  • शेषनाग कालसर्प योग

 

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें
ज्योतिषाचार्य गुरु माँ इन्दुसागर  | Call or whatsapp us @ 8076121900

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